Pahalgam Terror Attack: विपक्षी राजनीतिक दलों की चुप्‍पी खड़े कर रही कई सवाल

विपक्षी राजनीतिक दलों के नेता क्या अब इन आतंकवादियों के बारे में कुछ नहीं बोलना चाहेंगे, समझ आता है कि राजनीतिक द्वेष में सत्ता पक्ष के विरूद्ध विपक्षी दलों के नेता कुछ भी बोल सकते हैं। किन्तु इन विपक्षी दलों के अंदर की मानवता कहां मर गई है। जो इन्हें यह नहीं दिखाई देता कि मरने वाला बेकसूर हिन्दू धर्म से और मारने वाला हमेशा की तरह आतंक फैलाने वाला आतंकवादी विशेष समुदाय से है।

यहां विशेष शब्द भी अनुचित ही है क्योंकि उपर्युक्त विशेष शब्द तो किसी विशेषता को प्रदर्शित करने के लिए है।
यहां उचित यही होगा कि इन्हें अधर्मी, कातिल समाज के लोग कहना ही उचित होगा, क्योंकि इनके समुदाय में भी कुछ लोग अमन और शान्ति ही चाहते हैं। किन्तु कुछ लोगों ने इस समुदाय के अंतर्गत अधर्म का मार्ग चुना। किन्तु ये जड़ मूर्ख अपने समुदाय के भी नहीं हुए इन्होंने इस समुदाय के अंतर्गत अपने ही समुदाय के अमन और शान्ति चाहने वाले प्राणियों को भी मौत की नींद सुला दिया। इसलिए शायद कहा जाता है कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता, यहां भी सुधार की आवश्यकता है क्योंकि जहां बात धर्म की आती है तो धर्म तो सबको जीने के लिए समानता का अधिकार देता है। बल्कि यहां यह कहना उचित होगा कि आतंक का कोई समुदाय नहीं होता और जो इन आतंकवादी सोच या विचार को बढ़ावा देने का कार्य करे वो भी प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से आतंकवादी ही है। जोकि धर्म और समाज के खिलाफ है। इसलिए ऐसी सोच या विचारधारा के लोगों का समूल नाश हो ही जाना चाहिए।
और इस समुदाय के अंतर्गत रूढ़िवादी आतंकवादियों ने अपना एक अलग ही समाज का निर्माण करना प्रारंभ कर दिया। जहां ये रूढ़िवादी (आतंकवादी) अपने विचारों को समाज पर बलपूर्वक जबरदस्ती थोपने के लिए आतंक का सहारा ले रहे हैं।

यह कांग्रेस का राजनीतिक द्वेष ही तो था, जो हिन्दुओं की शिक्षा पद्धति जैसे गुरुकुल की संख्या समय के साथ संकुचित होते चली गई और आज न के बराबर हो गई और कट्टरवादी सोच को और उनके जनसंख्या को बढ़ावा देने वाली सोच का विस्तार होता चला गया।

सच कहें तो इसके पीछे कांग्रेसी मानसिकता ही दृष्टव्य है क्योंकि यदि मस्जिदों में कुरान पढ़ाने के स्थान पर हिन्दुओं के पवित्र ग्रंथों जैसे गीता आदि के उपदेशों का अध्ययन करवाया होता तो यह निश्चित था कि आज हिन्दुओं की हत्या नहीं हो रही होती अपितु अन्य समुदाय के लोग भी हमारे पवित्र धर्म तथा हिन्दू धर्म की धार्मिक पुस्तकों के महत्व को समझते एवम् सम्मान करते हुए सभी प्राणियों में देवतुल्य प्राणों की कीमत को समझते तथा निर्दोष हिन्दुओं की हत्या जैसा जघन्य व निर्ममतापूर्वक, बर्बरतापूर्वक अक्षम्य अपराध करते वक्त सौ बार अवश्य ही सोचने पर विवश होते।

यह कांग्रेस का राजनीतिक द्वेष ही तो था, जो हिन्दुओं की शिक्षा पद्धति जैसे गुरुकुल की संख्या समय के साथ संकुचित होते चली गई और आज न के बराबर हो गई और कट्टरवादी सोच को और उनके जनसंख्या को बढ़ावा देने वाली सोच का विस्तार होता चला गया। यहां भी इस दोगली कांग्रेस पार्टी का दृष्टिव चरित्र समझ में आता है क्योंकि ये कांग्रेस पार्टी है जिसने (1) हम दो और हमारे दो तथा (2) छोटा परिवार सुखी परिवार आदि जैसे नारा दिया। इसमें तनिक भी संदेह नहीं कि कांग्रेस हिन्दुओं के जनसंख्या को सिमटाने अर्थात् जनसंख्या को घटाने के उद्देश्य से ये षड्यंत्रकारी नारा दिया तथा कांग्रेसियों ने अपने रूढ़िवादी सोच को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए पहले तो भारत का बंटवारा धर्म और समुदाय (अधर्म) के नाम पर कर दिया जिसका नतीजा यह हुआ कि अपने ही देश का एक टुकड़ा, जो की भारत का ही अभिन्न अंग है पाकिस्तान बन गया। कांग्रेस की मानसिकता यहीं नहीं खत्म हुई। यहां क्या सोच कर हमारे देश का बंटवारा किया गया भाई जब एक समुदाय के लोगों ने अपने रूढ़िवादी सोच के कारण गांधी और नेहरू के द्वारा भारत का एक टुकड़ा कर पाकिस्तान बना दिया तो आज पुनः हमारे देश में यह रूढ़िवादी सोच कहां से जागृत हो रही है। हिन्दुओं के साथ, आपस में ही हिन्दुओं के मानसिक स्तर पर जातिवाद का विष घोलकर आपस में ही दुश्मन बना दिया ताकि हिन्दू आपस में ही जातिवाद के नाम पर उलझा रहे और ये आतंकवादी अपने रूढ़िवादी विचारधारा को कामयाब बनाते हुए अपने समुदाय के ग्रन्थ को आधार बनाकर भारत में अपनी जनसंख्या को बढ़ाते जाएं और ये अल्पमत से बहुमत में आ जाएं। यहां ये भी बात ध्यान देने योग्य है कि जब ये आतंकवादी अल्पमत में हैं तो ये नरसंहार की सभी पराकाष्ठा पार कर रहे हैं। तो जरा सोचो भारत के सनातनियों, ये आतंकवादी उस दिन क्या करेंगे जब ये खुद बहुमत में होंगे।

जिस कांग्रेसी सोच ने देश का बंटवारा धर्म (हिन्दू) और सामुदाय (मुस्लिम) के आधार पर करवाया। तो फिर गांधी जी के उस कथन का क्या मतलब हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई आपस में सब भाई भाई। यहां यह तो ठीक और उचित है कि हिन्दू सिक्ख भाई भाई क्योंकि इन्होंने देश के लिए सदैव अभूतपूर्व बलिदान देने में जरा भी नहीं हिचकिचाए और ईसाई से भी हमें कोई दिक्कत नहीं क्योंकि ये भी शांति ही चाहते हैं। किन्तु यहां एक बार पर फिर से विचार करें। “हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई आपस में सब भाई भाई”, यहां हिन्दू, सिक्ख और ईसाई तक तो बिल्कुल ठीक है। किन्तु यदि मुस्लिम भाई ही थे तो उनको हमारे देश का एक टुकड़ा देकर अलग क्यों किया, इससे तो यह स्पष्ट है कि गांधी और नेहरु ने मिलकर देश को व सनातनी हिन्दुओं के अतिरिक्त, मुस्लिम समुदाय के सच्चे मुस्लिमों के अतिरिक्त अन्य धर्म और सम्प्रदाय के सनातनी लोगों को ठगा और सिर्फ और सिर्फ छलावा किया।

वैसे भी कुरान पढ़ाने के लिए गांधी और नेहरु ने पाकिस्तान को हमारे ही मातृभूमि का एक टुकड़ा अलग कर दिया तो फिर हिंदुस्तान हिन्दुओं के हित में होना चाहिए रूढ़िवादी आतंकवादी विचारधारा के लिए बिल्कुल भी नहीं। किसी भी कीमत पर नहीं।

पहले तो गांधी ने देश बांटा फिर सनातनी हिन्दुओं को उनके विचारों में जातिगत विचारधारा में उलझा कर बांट दिया, इस पर भी कांग्रेस के पेट की अग्नि शांत नहीं हुई तो हम सबके परमपूज्यनीय माननीय बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान में कहीं संशोधन तो कहीं पूरा बदलाव कर सनातनी हिंदुओं को सभी प्रकार के लाभ से वंचित करते हुए सारे कानून के रूपरेखा को कुछ इस तरफ से तैयार किया की जहां एक तरफ मुस्लिमों को पाकिस्तान दिया वहीं भारत के संविधान के अंतर्गत बहुतायत हित लाभ भी उन्हीं मुस्लिमों को प्रदान किया तथा हिन्दुओं को क्या दिया सिर्फ जातिगत भेदभाव। हिन्दुओं में जातिगत भेदभाव सदैव बना रहे, ऊंच-नीच की भावना हमेशा पनपती रहे, वो आपस में ही मानसिक रूप से एक दूसरे के साथ उलझे रहें। आपस में एक दूसरे के कट्टर दुश्मन बन जाएं। आज तक वक्फ का जो दंश देश झेल रहा है।

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उस वक्फ बोर्ड की जनक कांग्रेस की मानसिकता ही तो है। जब देश हिन्दुस्तानियों का है तो जब कोई हिन्दू किसी धार्मिक यात्रा पर जाता है तो उसे कोई सब्सिडी क्यों नहीं प्राप्त होती जबकि वहीं इसी हिंदुस्तान से जब कोई मुस्लिम हज के लिए मक्का मदीना जाता है तो सरकार के तरफ से उसे पूरी सब्सिडी दी जाती है। कोई हिन्दू और सिर्फ हिन्दू अपने धर्म के ग्रन्थों की शिक्षा को संवैधानिक रूप से किसी भी विद्यालय में किसी भी छात्र को नहीं पढ़ा सकता। वहीं मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों इत्यादि में कुरान का पाठ पढ़ा सकते हैं। यहां भी कांग्रेस की घटिया मानसिकता तो देखिए इन कुरान का अध्ययन करवाने वाले मुस्लिमों को मासिक भत्ता प्रदान किया जाता है जबकि यह सर्वविदित है कि कुरान के अंतर्गत गैर मुस्लिम सिर्फ काफिर यानी शैतान है और जहां अकेले पाओ इन गैर मुस्लिमों का खुलेआम कत्लेआम करो, यह इनकी कुरान है तो हिंदुस्तान में यदि किसी समुदाय के किताब को प्रतिबंधित करना था तो कुरान को करना चाहिए था न कि हिन्दुओं के पवित्र ग्रंथों को। वैसे भी कुरान पढ़ाने के लिए गांधी और नेहरु ने पाकिस्तान को हमारे ही मातृभूमि का एक टुकड़ा अलग कर दिया तो फिर हिंदुस्तान हिन्दुओं के हित में होना चाहिए रूढ़िवादी आतंकवादी विचारधारा के लिए बिल्कुल भी नहीं। किसी भी कीमत पर नहीं। ये देश सिर्फ हिंदुस्तानियों का है जिसका अभिन्न अंग है यहां के मूलवासी हिन्दू, सिक्ख एवम् ईसाई व सच्चे मुस्लिम।

अंत में मैं एक सनातनी होने के नाते सभी हिन्दुओं से आह्वाहन करूंगा के अपने धर्म के रक्षा के लिए अपने तथा अपनों के प्राणों के रक्षा के खातिर जीवन रक्षक हथियार रखें और भारत सरकार से भी अपने समाज के रक्षा के खातिर, जिन हथियारों के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होती है, उसका संवैधानिक प्रकार से मांग रखे। क्योंकि जो आतंकवादी गतिविधियां हैं वो बेहद संदिग्ध है और सिर्फ निर्दोष हिन्दुओं के हत्या करने के लिए आतुर हैं। इसलिए प्रत्येक सनातनी को धर्म की रक्षा के लिए प्रत्येक सनातनी हिन्दू को निडर और साहसिक होना ही पड़ेगा और समय आने पर धर्म की रक्षा के लिए हथियार भी उठाना ही पड़ेगा क्योंकि सरकार प्रत्येक सनातनी को अंगरक्षक नहीं प्रदान कर सकती।

यहां जो पहलगाम में जो आतंकी घटना को आतंकवादियों ने अंजाम दिया है। उसके बाद तो मैं भारत का वासी एवम् एक सनातनी हिन्दू होने के नाते देश के सर्वश्रेष्ठ न्यायालय तथा भारत सरकार से करबद्ध विशेष अनुरोध व अनुमोदन करूंगा कि आतंकवादी घटनाओं से निपटने तथा निर्दोष हिन्दुओं की भविष्य में निर्मम हत्या न हो। इसके लिए हमारे हिन्दुओं के पवित्र ग्रंथों के अनुरूप संविधान में संशोधन किया जाना परम आवश्यक है।

अजय कुमार पाण्डेय, नगर प्रचार प्रमुख, आनन्द नगर, लखनऊ दक्षिण

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